Tuesday, 5 July 2016

 हल्की बूंदाबांदी हो रही है, ऐसे में कुछ लोग घर में बैठना ज्यादा पसंद करते हैं और कुछ लम्बी ड्राइव पर जाना और जिनके घर आसमान की छत के नीचे है वे तो बस इसी सोच में लगे रहते हैं कि बारिश से कैसे बचा जाये | बारिश तो एक ही है पर हर किसी के लिए अलग -अलग रूप में आती है |ऐसी बारिश में कविता के गांव में जाना बहुत भाता है ,कागज पर शब्दों की नाव बहाना,मन के भावों को शब्द देना और प्रकृति को कविता में कैद कर लेना |बरसती बूंदों की अठखेलियां निहारते हुए हाथ  में अदरक की चाय का कप लिए किसी की कवितायेँ सुनना और भावनाओं के समुद्र में डूब जाना |
मुंबई पत्थरों का शहर है पर यहाँ सुकोमल भावों के कवियों की कोई कमी नहीं |ऐसे ही 26  जून 2016 को जब झमझमाझम बारिश हो रही थी "भारतीय  जनभाषा प्रचार समिति " एवं  अखिल भारतीय साहित्य परिषद" का जोरदार कवि सम्मलेन माननीय गजलकार दीक्षित दनकौरी की अध्यक्षता में  ठाणे में हुआ |इस कार्यक्रम में  शिरकत की भोपाल के अंजुम बाराबंकवी ,गुना के असलम राशिद,ब्रजेश तरुवर गाजियाबाद ,दुर्गेश दुबे वाराणसी ,विशेष उपस्थिति मराठी के प्रसिद्ध गजलकार प्रदीप निफाडकर की थी और सञ्चालन किया युवा कवि संदीप शज़र ने ,कार्यक्रम के संयोजक संतोष सिंह थे और कार्यक्रम के संचालक रामप्यारे सिंह रघुवंशी थे|प्रमुख अतिथि श्री  केशर सिंह बिष्ट (नवभारत ),श्री राजेश विक्रांत (संपादक सामना ),एडवोकेट बी .एल .शर्मा ,श्री संतोष पांडे थे |
इस कार्यक्रम में गजलों और गीतों की बारिश कुछ इस प्रकार हुई की गरजने वाले बादल भी कुछ फीके पड़ गए|सम्मानीय लेखिका कृष्णा खत्री की उपस्थिति उल्लेखनीय रही| मुंबई शहर की लगभग सभी कवयित्रियाँ "शिवानी साहित्य मंच "की संस्थापिका प्रमिला शर्मा ,देहली लाल किले पर कविता पढ़ने वाली सुमीता केशवा ,प्रभा शर्मा ,शिल्पा सोनटक्के ,अनीता रवि ,लक्ष्मी यादव ,सरोज लोढया,मधु श्रृंगी आदि सभी उपस्थित थी |कविता के गांव में सभी सहेलियों के साथ मैं भी उपस्थित थी|

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